माँ हरसिद्धि शक्तिपीठ - आस्था का अमूल्य धाम 🌼
पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर माता सती का अंग यहां गिरा था, तब उनकी कोहनी यहां गिरी थी, जिससे यह स्थान एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ बना। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण और बलराम ने भी यहां मां की पूजा-अर्चना कर अपनी विजय सुनिश्चित की थी।
मंदिर की विशेषताएं:
मंदिर में मां की दो प्रतिमाएं हैं - एक छोटी और एक बड़ी। इन्हें "महामाया" और "अन्नपूर्णा" के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर परिसर में विशाल दीपमाला (स्तंभ) है, जिसे महाराजा महादजी सिंधिया (महादजी शिंदे) ने बनवाया था। इसे प्रतिदिन हजारों दीपक जलाकर सजाया जाता है, जो एक अद्भुत और आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करता है।
नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां विशाल मेला लगता है और मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।
आध्यात्मिक महत्व:
मान्यता है कि मां हरसिद्धि का दर्शन-पूजन करने से भक्तों के सभी कष्ट 'हर' जाते हैं और उनकी हर मनोकामना 'सिद्ध' होती है, इसीलिए उनका नाम 'हर-सिद्धि' पड़ा। महाकाल की नगरी में आने वाला हर श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने अवश्य आता है।
एक बार जरूर करें माँ के दिव्य दर्शन और पाएं आत्मिक शांति और असीम कृपा।
🌼 जय माँ हरसिद्धि! 🌼
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